पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते और खराब हो गए हैं। भारत ने पाकिस्तान पर कई पाबंदियां लगाईं, जिनमें सिंधु जल संधि को रद्द करना भी शामिल है। इससे पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है और वहां के नेता गुस्से में बयान दे रहे हैं। अब खबर है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में झेलम नदी का पानी अचानक बढ़ गया, जिससे बाढ़ आ गई। पीओके के अधिकारी कह रहे हैं कि भारत ने शनिवार को ‘उरी बांध’ से बिना बताए पानी छोड़ दिया। उन्होंने भारत पर “जल आतंकवाद” का इल्जाम लगाया है।

पीओके में बाढ़ से डर और अफरा-तफरी

पानी छोड़ने की वजह से पीओके के हट्टियन बाला में बाढ़ जैसा माहौल है। नदी के पास रहने वाले लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों पर भाग रहे हैं। भारत ने इन इल्जामों पर न कुछ कहा है और न ही इंकार किया है। पाकिस्तान का कहना है कि ये सिंधु जल संधि और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले के बाद भारत ने 23 अप्रैल को ये संधि रद्द कर दी थी। पीओके के लोग बताते हैं कि अचानक तेज पानी आने से वे अपनी जान और सामान बचाने में जूझ रहे हैं।

लोग डरे हुए, भागने को मजबूर

भारतीय न्यूज चैनलों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में तेज बारिश की वजह से पानी छोड़ा गया। पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद और चकोटी में अधिकारियों ने लाउडस्पीकर से लोगों को चेतावनी दी और इलाके खाली करने को कहा। डुमेल गांव के मुहम्मद आसिफ ने बताया, “हमें पहले से कुछ नहीं बताया गया। पानी अचानक तेजी से आया और हम अपनी जान-माल बचाने के लिए परेशान हैं।”

नदी के किनारे न जाएं

मुजफ्फराबाद के एक अधिकारी ने लोगों को नदी के पास या आसपास के इलाकों से दूर रहने को कहा। उनका कहना है कि भारत ने झेलम नदी में जरूरत से ज्यादा पानी छोड़ा, जिससे मीडियम लेवल की बाढ़ आई है। कोहाला और धालकोट के निचले इलाकों में भी बाढ़ की खबरें हैं, जिसमें जानवरों और फसलों को नुकसान हुआ है।

पानी की जानकारी देने का नियम 

सिंधु जल संधि, जो विश्व बैंक की मदद से बनी थी, कहती है कि भारत और पाकिस्तान को नदी के पानी को कंट्रोल करने और नुकसान से बचने के लिए एक-दूसरे को पानी छोड़ने की जानकारी देनी चाहिए। लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि भारत ने ऐसा नहीं किया।

पीओके में राहत का काम शुरू

पीओके के अधिकारी कहते हैं कि उनकी पहली कोशिश लोगों को सुरक्षित करना है। हट्टियन बाला प्रशासन ने टेंपरेरी तंबू और कैंप बनाए हैं और बचाव टीमें काम कर रही हैं। जिला आयुक्त बिलाल अहमद ने कहा, “हम पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ये संकट बहुत बड़ा है।”

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