जयपुर में चार दोस्तों ने सोशल मीडिया को ठगी का हथियार बना लिया। इन लोगों ने एस्कॉर्ट सर्विस और बॉडी मसाज के नाम पर हजारों लोगों को चूना लगाया। लेकिन जयपुर की करधनी थाना पुलिस ने इनके काले कारनामों का पर्दाफाश कर चारों को सलाखों के पीछे भेज दिया।

क्या था ठगी का खेल?


इन चार दोस्तों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का गलत इस्तेमाल करके लोगों को लूटने का धंधा शुरू किया। ये लोग फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर एस्कॉर्ट सर्विस और बॉडी मसाज के झूठे विज्ञापन डालते थे। इन विज्ञापनों में आकर्षक तस्वीरें और कॉन्टैक्ट नंबर होते थे। जब कोई इनसे सर्विस लेने के लिए संपर्क करता, तो ये लोग पहले 2,000 से 5,000 रुपये एडवांस मांगते। जैसे ही पेमेंट मिलता, ये ग्राहक का नंबर ब्लॉक कर देते और सिम तोड़कर फेंक देते। इस तरह, हजारों लोग इनके जाल में फंस गए। पुलिस को शिकायत मिलने के बाद करधनी थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

शातिर दिमाग, फर्जी सिम का जाल

पुलिस के मुताबिक, ये चारों ठग बहुत चालाक थे। डीसीपी वेस्ट अमित कुमार ने बताया कि ये लोग पकड़े जाने से बचने के लिए हर 3-4 दिन में सिम बदल लेते थे। एक सिम से 2-3 ठगी करने के बाद उसे तोड़कर फेंक देते, ताकि शिकायत होने पर पुलिस उनकी लोकेशन न पकड़ सके। गिरोह का एक सदस्य, कमलेश चौधरी, टेलीकॉम कंपनी में प्रमोटर था। वह फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों को मुफ्त रिचार्ज का लालच देकर उनके नाम से दो सिम खरीदता, जिनमें से एक सिम अपने पास रख लेता था और दूसरी सिम मजदूरों को देता था। पिछले 2-3 महीनों में उसने 149 फर्जी सिम हासिल किए। इन सिम का इस्तेमाल ठगी के लिए होता था।

 

कैसे पकड़े गए ठग?


जयपुर पुलिस को जब इस गिरोह की शिकायत मिली, तो करधनी थाना पुलिस ने छानबीन शुरू की। पुलिस ने सोशल मीडिया पर इनके विज्ञापनों और कॉन्टैक्ट नंबरों को ट्रैक किया। कई पीड़ितों की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और चारों ठगों को धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं—विनोद चौधरी (कालवाड़ रोड), कमलेश चौधरी (करधनी), राजू जाखड़ (गोविंदपुरा), और मदन। पुलिस ने इनके पास से सिम कार्ड जारी करने की मशीन, 8 मोबाइल फोन, 24 सिम कार्ड, 8 एटीएम कार्ड, कुछ पासबुक, और 19,500 रुपये नकद बरामद किए।

सोशल मीडिया पर ठगी का बढ़ता खतरा


यह मामला दिखाता है कि सोशल मीडिया आजकल ठगी का बड़ा जरिया बन गया है। हथियारों की तस्करी, ड्रग्स, और अब एस्कॉर्ट सर्विस जैसे फर्जीवाड़े के लिए भी इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है। लोग आकर्षक ऑफर्स और विज्ञापनों के चक्कर में फंस जाते हैं। जयपुर पुलिस ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करके एक मिसाल कायम की है, लेकिन यह हमें भी सावधान रहने की सीख देता है। सोशल मीडिया पर किसी भी सर्विस या ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी अच्छे से जाँच करें।

कैसे बचें ऐसी ठगी से?

 

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