नॉर्वे चेस टूर्नामेंट:  भारत के युवा वर्ल्ड चैंपियन डोमाराजू गुकेश ने नॉर्वे चेस 2025 टूर्नामेंट के छठे दौर में दुनिया के पूर्व नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को पहली बार क्लासिकल चेस में मात देकर इतिहास रच दिया। गुकेश ने सफेद मोहरों से खेलते हुए शानदार रणनीति दिखाई और कार्लसन की एक छोटी सी गलती को अपनी यादगार जीत में बदल दिया। नॉर्वे के स्टावेंजर में अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेल रहे 34 साल के कार्लसन इस हार से इतने परेशान हुए कि उन्होंने चेस बोर्ड पर हाथ पटक दिया। आइए, इस शानदार मुकाबले और इसके पीछे की कहानी को जानते हैं।

गुकेश की शानदार जीत

नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में क्लासिकल टाइम कंट्रोल फॉर्मेट होता है, जिसमें खिलाड़ियों को कम समय में तेजी से चालें चलानी पड़ती हैं। इस गेम में कार्लसन शुरू से गुकेश पर हावी दिख रहे थे और जीत की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन 18 साल के गुकेश ने हार नहीं मानी। उन्होंने धैर्य और चतुराई से कार्लसन की हर चाल का जवाब दिया। गेम के आखिरी दौर में कार्लसन ने समय के दबाव में आकर एक बड़ी गलती कर दी, जिसका गुकेश ने फायदा उठाकर उन्हें हरा दिया।

जीत के बाद गुकेश बहुत खुश थे। उन्होंने टूर्नामेंट की लॉबी में अपने कोच ग्रेजगोर्ज गजेव्स्की के साथ जोरदार हाई-फाइव किया। यह जीत गुकेश के लिए खास थी, क्योंकि टूर्नामेंट के पहले दौर में वे काले मोहरों से खेलते हुए कार्लसन से हार गए थे। इस बार उन्होंने कमबैक करते हुए छह खिलाड़ियों की इस प्रतियोगिता में अपनी मजबूत स्थिति बनाई।

कार्लसन की निराशा

मैग्नस कार्लसन, जो क्लासिकल चेस में अपने शानदार खेल के लिए मशहूर हैं, इस हार से बहुत निराश दिखे। गेम खत्म होने के बाद उन्होंने हताशा में चेस बोर्ड पर हाथ दे मारा और जल्दी से टूर्नामेंट स्थल से अपनी कार की ओर चले गए। कार्लसन पहले गुकेश के क्लासिकल गेम और समय के दबाव में शांत रहने की उनकी काबिलियत की आलोचना कर चुके थे। पहले दौर में गुकेश को हराने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, “अगर तुम किंग के करीब आओ, तो चूकना नहीं चाहिए।” फैंस ने इसे कार्लसन का खुद को चेस का ‘किंग’ बताने वाला तंज माना था। लेकिन गुकेश ने इस बार उनकी बात का जवाब अपनी जीत से दे दिया।

भारतीय चेस का दबदबा

यह दूसरी बार है जब नॉर्वे चेस में किसी भारतीय युवा खिलाड़ी ने कार्लसन को क्लासिकल चेस में हराया। पिछले साल आर. प्रग्गनानंदा ने कार्लसन को मात दी थी, और इस साल गुकेश ने यह कमाल किया। यह भारतीय चेस के लिए गर्व का पल है कि हमारे युवा खिलाड़ी दुनिया के दिग्गजों को टक्कर दे रहे हैं। गुकेश की इस जीत ने उन्हें विश्व चैंपियनशिप की दौड़ में और मजबूत कर दिया है।

सुसान पोल्गर का क्या कहना है?

मशहूर चेस खिलाड़ी सुसान पोल्गर ने इस हार को कार्लसन के करियर की सबसे दुखद हार बताया। उन्होंने X पर लिखा, “कार्लसन क्लासिकल चेस में बहुत कम हारते हैं और गलतियां तो बिल्कुल नहीं करते। गुकेश के खिलाफ छठे दौर में वे जीत की ओर थे, लेकिन समय के दबाव में एक गलती ने सब पलट दिया। यह कार्लसन की सबसे दर्दनाक हारों में से एक है।” पोल्गर ने गुकेश की जिद और रणनीति की भी खूब तारीफ की।

गुकेश का भविष्य

18 साल की उम्र में वर्ल्ड चैंपियन बनने वाले गुकेश ने दिखा दिया कि वे बड़े दबाव में भी दिग्गजों को हरा सकते हैं। नॉर्वे चेस में उनकी यह जीत चेस की दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत को दिखाती है। यह जीत न सिर्फ गुकेश के लिए, बल्कि पूरे भारतीय चेस के लिए एक बड़ा कदम है।

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