पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। भारत ने हमले के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ पांच सख्त कदम उठाए, जिनमें सिंधु जल समझौते को रद्द करना, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद करना और पाकिस्तानी एम्बेसी से सैन्य अधिकारियों को वापस भेजना शामिल है। जवाब में, पाकिस्तान ने 24 अप्रैल 2025 को नेशनल सिक्योरिटी कमेटी की बैठक में 53 साल पुराने शिमला समझौते को रद्द करने का फैसला लिया। इसकी अध्यक्षता पीएम शहबाज शरीफ ने की। लेकिन शिमला समझौता क्या है, और इसे रद्द करने का क्या मतलब है? आइए विस्तार से जानते हैं।

शिमला समझौता क्या है?

शिमला समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 2 जुलाई 1972 को हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ एक ऐतिहासिक समझौता था। इसे भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने साइन किया था। यह समझौता 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हुआ, जिसमें भारत ने पाकिस्तान को हराकर पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराया, जो बाद में बांग्लादेश बन गया। इस युद्ध में भारत ने 90,000 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया था, और शिमला समझौते ने इस तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई थी।

समझौते के मेन प्वाइंट्स
शिमला समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करना था। इसके कुछ मेन प्वाइंट्स इस प्रकार थे:

द्विपक्षीय बातचीत: भारत और पाकिस्तान अपने सभी विवाद, जिसमें कश्मीर भी शामिल है, आपसी बातचीत से सुलझाएंगे। किसी तीसरे देश या संयुक्त राष्ट्र की दखलअंदाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।

लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC): 17 दिसंबर 1971 की स्थिति को मान्यता देते हुए कश्मीर में LoC को स्थायी रूप से स्वीकार किया गया। दोनों देशों ने इसे बदलने की कोशिश न करने का वादा किया।

आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध: दोनों देशों ने व्यापार, संचार, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने की बात कही।

पाकिस्तान ने क्यों रद्द किया समझौता?

पहलगाम हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाए, जिसमें सिंधु जल संधि को निलंबित करना शामिल था। यह पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका था, क्योंकि सिंधु नदी प्रणाली उसकी 90% से ज्यादा कृषि भूमि को पानी देती है। जवाब में, पाकिस्तान ने शिमला समझौते को रद्द कर दिया। पाकिस्तानी मीडिया में यह भी चर्चा है कि भारत ने अगर पानी रोका, तो यह जंग जैसा होगा। लेकिन इस कदम को कई लोग पाकिस्तान का हताशा भरा फैसला मान रहे हैं, क्योंकि शिमला समझौते ने ही दोनों देशों के बीच कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बनाया था, जिससे तीसरे पक्ष की दखलअंदाजी रुकी थी।

शिमला समझौते का महत्व और असर

शिमला समझौता दोनों देशों के बीच शांति की एक उम्मीद था। इसने कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बनाकर भारत को मजबूत स्थिति दी। लेकिन इसके बावजूद, दोनों देशों के रिश्ते बेहतर नहीं हुए। 1999 का कारगिल युद्ध और कई आतंकी हमले, जैसे 26/11 मुंबई हमला, इस समझौते की भावना के खिलाफ गए। पाकिस्तान ने बार-बार LoC का उल्लंघन किया और आतंकवाद को समर्थन दिया। पहलगाम हमले ने एक बार फिर इस समझौते की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर दिए।






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