नेपाल बाढ़: राहत अभियान तेज, 288 भारतीयों समेत बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता

नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। तेज बहाव और मलबे की चपेट में आने से पुल, सड़कें, बस्तियां और जरूरी बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने तथा लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आपदा में 359 लोगों की मौत और 1,300 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि प्रभावित इलाकों में संपर्क और परिवहन व्यवस्था बाधित होने के कारण वास्तविक स्थिति का आकलन करने में समय लग सकता है।
नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास भूकंपीय गतिविधि और ग्लेशियर टूटने की आशंका को बाढ़ की संभावित वजहों में शामिल किया गया है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में पानी का बहाव बढ़ने से रसुवा और आसपास के जिलों में हालात गंभीर हुए। कई स्थानों पर मलबे ने रास्ते बंद कर दिए हैं।
इस आपदा के बाद 288 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है। इनमें मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री शामिल बताए गए हैं। प्रभावित परिवारों की चिंता बढ़ गई है और परिजन अपने रिश्तेदारों की सुरक्षित वापसी की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
भारतीय दूतावास के साथ-साथ कई राज्य सरकारों ने प्रभावित नागरिकों और उनके परिवारों के लिए सहायता व्यवस्था शुरू की है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान और अन्य राज्यों में हेल्पलाइन तथा समन्वय प्रयासों के जरिए लापता लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रशासन ने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करने और केवल सरकारी विभागों, दूतावासों तथा अधिकृत राहत एजेंसियों के अपडेट पर विश्वास करने की अपील की है। मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े राहत अभियान के साथ बदल सकते हैं। Aajka Sach आधिकारिक जानकारी मिलने पर इस खबर को अपडेट करेगा।
