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'FAST-DS' स्कीम का ऐलान-विदेशी संपत्ति घोषित करने का आखिरी मौका, 16 अगस्त से खुल रही है विंडो

15 August 2026
'FAST-DS' स्कीम का ऐलान-विदेशी संपत्ति घोषित करने का आखिरी मौका, 16 अगस्त से खुल रही है विंडो

नई दिल्ली: भारत सरकार ने काले धन के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अब छोटे करदाताओं को बड़ी राहत दी है। बजट 2026-27 में घोषित की गई 'छोटे करदाताओं की विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना' (FAST-DS) के नियम अधिसूचित कर दिए गए हैं। यह योजना उन लोगों के लिए 'सेफ पैसेज' की तरह है जिनके पास विदेश में बैंक खाते, शेयर या अन्य संपत्तियां हैं, लेकिन उन्होंने अपने आयकर रिटर्न (ITR) में इसका विवरण नहीं दिया था।

योजना की समय सीमा (Deadlines):

शुरुआत: 16 अगस्त, 2026

अंतिम तिथि: 31 दिसंबर, 2026

किसे होगा लाभ?

यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो तकनीकी कारणों से नियमों का उल्लंघन कर बैठे थे, जैसे:

पूर्व छात्र: जिन्होंने विदेश में पढ़ाई के दौरान बैंक खाता खोला और उसे बंद करना या घोषित करना भूल गए।

आईटी/एमएनसी कर्मचारी: जिन्हें कंपनी से विदेशी शेयर (ESOPs) मिले, लेकिन ITR में Schedule FA नहीं भरा।

वापस आए एनआरआई (NRIs): जो भारत लौटने के बाद अपनी विदेशी निवेश की जानकारी देना भूल गए।

युवा पेशेवर: जिनका विदेश में छोटा-मोटा निवेश या बचत खाता है।

दो श्रेणियों में बंटी है योजना (Tax & Penalty):

Category 1

₹1 करोड़ तक की अघोषित विदेशी आय या संपत्ति

30% टैक्स + 30% अतिरिक्त शुल्क (कुल 60%)

Category 2

₹5 करोड़ तक की संपत्ति (जो वैध आय से खरीदी गई थी पर घोषित नहीं की गई)

केवल ₹1 लाख की फ्लैट फीस

घोषणा करने के फायदे:

ब्लैक मनी एक्ट से सुरक्षा: इस योजना के तहत घोषणा करने वालों को ब्लैक मनी एक्ट, 2015 के तहत होने वाली कठोर कानूनी कार्रवाई और जेल (3 से 10 साल) से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी।

जुर्माने से राहत: सामान्यतः विदेशी संपत्ति न छिपाने पर ₹10 लाख प्रति वर्ष का भारी जुर्माना लगता है, जिससे यहाँ बचा जा सकता है।

चेतावनी: 31 दिसंबर के बाद क्या होगा?

आयकर विभाग के पास 'ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन' (AEOI) के जरिए विदेशी खातों का डेटा पहले से मौजूद है। यदि 31 दिसंबर तक किसी ने खुद से जानकारी नहीं दी और विभाग ने उसे पकड़ा, तो उसे संपत्ति के मूल्य का 120% तक जुर्माना और 7 साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।